Tuesday, April 14, 2009

कल की कल


मत इंतज़ार कराओ हमे इतना,
की वक़्त के फैसले पर अफ़सोस हो जाएँ!
क्या पता कल तुम लौटकर आओ,
और हम खामोश हो जाएँ!
दूरियों से फर्क पड़ता नहीं,
बात तो दिलों कि नज़दीकियों से होती है !
दोस्ती तो कुछ आप जैसो से है,
वरना मुलाकात तो जाने कितनों से होती है !
दिल से खेलना हमे आता नहीं,
इसलिये इश्क की बाजी हम हार गए!
शायद मेरी जिन्दगी से बहुत प्यार था उन्हें,
इसलिये मुझे जिंदा ही मार गए!
मना लूँगा आपको रुठकर तो देखो,
जोड़ लूँगा आपको टूटकर तो देखो।
नादाँ हूँ पर इतना भी नहीं ,
थाम लूँगा आपको छूट कर तो देखो।

लोग मोहब्बत को खुदा का नाम देते है,
कोई करता है तो इल्जाम देते है।
कहते है पत्थर दिल रोया नही करते,
और पत्थर के रोने को झरने का नाम देते है।

6 comments:

  1. आप हिन्दी में लिखते हैं. अच्छा लगता है. मेरी शुभकामनाऐं आपके साथ हैं

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  2. स्वागत है मित्र ब्लॉग की दुनिया में ,लेकिन एक प्रार्थना भी कि अगर अपने ब्लॉग पर लिखने में आप एक घंटा समय देते हैं तो दूसरे ब्लागों को पढने के लिए भी दो घंटे का समय सुरक्षित रखें. ब्लॉग की दुनिया में आने का असली लाभ तभी हासिल होगा.
    जय हिंद

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  3. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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  4. हुज़ूर आपका भी एहतिराम करता चलूं ...........
    इधर से गुज़रा था, सोचा, सलाम करता चलूं ऽऽऽऽऽऽऽऽ

    ये मेरे ख्वाब की दुनिया नहीं सही, लेकिन
    अब आ गया हूं तो दो दिन क़याम करता चलूं
    -(बकौल मूल शायर)

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  5. अच्छा लिखा है आपने और सत्य भी , शानदार लेखन के लिए धन्यवाद ।

    मयूर दुबे
    अपनी अपनी डगर

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